जिस मीडियम ने अन्ना हजारे के मूवमेंट को आगे बढाया उसी को
आधार बनाके “ आप” राजनीती में आई......असर
भी छोड़ा ......कुसी भी मिली.....लेकिन संभल नहीं पाए ......अब बात तो ये हे की जो
राज्य नहीं सम्भाल पाया वो देश सँभालने निकला हे ......शायद ही इससे पहले किसी
पार्टी की इतनी किरकिरी हुई जो इन दिनों सोशल मीडिया पे “ आप” के तथाकथित नायक की
हो रही हे . इस में वाट्सअप प्रमुख हे . कुछ मेसेज तो ऐसे होते जा रहे हे जैसे फ़ोन
पे ही युद्ध होने वाला हे .
सारी पार्टियों के पास जनता
से जुड़े कोई मुद्दा हे ही नहीं कोई मोदी को दिखा के डरा रहा हे तो कोई पिछले 60
साल दिखा के ......दरशल ये दर्द का इलाज करने से ज्यादा दर्द का प्रचार करने की
कोशिश हे ....जिसको दर्द हे उसे तो भोगना ही हे ......जनता को तो अगले पांच साल
कौन उनको लुटे ये तय करना हे .
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