Saturday, August 17, 2013

कितनी पार्टीया कितना बटवारा

कितनी पार्टीया कितना बटवारा

कितनी दीवारे उठी एक घर के दरम्या। …
घर कंही घूम हो गया दीवारों-दर के  दरम्या। ….

इन लाइन्स को अगर आने वाले भारत की तस्वीरों में देखा जाये तो लगता हे की आने वाला भारत कुछ इस तरह ही होगा देश के सामने जो भी मुश्किलें अभी हे उनको झुटला कर हर राजनेतिक पार्टी अपना ही फायदा देखने में लगी हे।

देश  में जिस तरह से लोकल पार्टी अपना -अपना राग अलाप रही हे  उसको देखते हुए यही लगता हे की सबको सिर्फ अपने चुनाव  एरिया के आलावा  ओर ओर कुछ नही सूझता .  हर तरफ जहा देखो वही यही हालात हे बंगाल की बात की  जाये तो वंहा ममता अंटी अपना राग अलाप रही हे। बिहार में लालू ओर नितीश अंकल अपनी अलग कबड्डी खेल रहे हे . चाहे बात साउथ की हो   या  पंजाब की हर जगह यही हालत हे .....हर किसी को सिर्फ अपनी -अपनी पड़ी हे .......देश की तरक्की के लिए सबसे ज्यादा जरुरी हे की कोई एक पार्टी बहुमत हासिल करे  लेकिन ये ये एक सपने जैसा हे .

तेलंगाना का मुद्दा भी इसी कड़ी का एक हिस्सा हे। ।कुच दिन रुक जाइये आप को हर तरफ से इसी तरह की आवाजे आने लगेगी। 

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